दूषित पानी के शिकायतकर्ताओं को महानगरपालिका का जवाब

पुलिस भी तुम,गवाह भी तुम और मुंसिफ भी तुम,फिर हम न्याय के लिए जायें तो कहां जायें,यह कहावत आपने बहुत बार सुनी होगी,मगर इसका ताजा प्रमाण नवी मुम्बई महानगरपालिका की एक जांच रिपोर्ट में दिखाई देता है। नवी मुम्बई में पानी कटौती की घोषणा और अमल के बाद नवी मुम्बई के कई इलाकों में, दूषित पानी की शिकायत अचानक से बढ़ गई। फिर क्या था पालिका ने भी शिकायतकर्ताओं को जवाब देने का तरीका ढूंढ़ निकाला। नवी मुम्बई की महिला महापौर सुजाता पाटिल पत्रकारों के पूरे लौ लश्कर के साथ,नवी मुम्बई के जल स्रोत मोरबे डैम और भोकरपाड़ा जल शुद्धिकरण केन्द्र का दौरा करने पहुंच गईं और वहां की प्रक्रिया को बिल्कुल सही ठहरा दिया।लेकिन इससे शिकायतकर्ताओं को शायद उचित जवाब नही मिल पाता,इसलिए पालिका प्रशासन ने 600 से ज्यादा जगहों के पानी के नमूने की जांच रिपोर्ट भी पेश कर दी और पानी को पूरी तरह से शुद्ध बता दिया। अब इसपर शिकायतकर्ताओं की तरफ से यह कहा जा रहा है कि जब पुलिस भी तुम,गवाह भी तुम और मुंसिफ भी तुम, फिर हमारे हक में फैसला आयेगा कहां से। सवाल यह उठता है कि अगर नवी मुम्बई महानगरपालिका का पानी इतना ही शुद्ध है तो फिर हर घर में आर ओ या फिल्टर पानी के जार या बोतलों का इस्तेमाल आर्थिक परेशानी के बावजूद क्यों किया जा रहा है, यहां तक कि पालिका प्रशासन से जुड़े अधिकारी स्वयं अपने कार्यालय में भी नल का पानी सीधे तौर पर नही पीते और लगभग सभी केबिन और टेबल पर फिल्टर पानी के बोतलों का इस्तेमाल किया जाता है



