बीज आकार के उपर 30% से ज्यादा वसूला जा रहा है अन्य शुल्क

भारत में जब बिजली व्यवस्था पूरी तरीके से निजी हाथों में चली जायेंगी,तो उन्हे खुले लूट की आजादी कैसे मिलेगी,इसकी प्रैक्टिस अभी से ही सरकारी विधुत वितरण कंपनियां आपको कराने में जुट गई हैं। यह प्रैक्टिस इसलिए कराई जा रही है कि आप निजी कंपनियों द्वारा की जानेवाली लूट का विरोध न कर पायें। यह सब एक बेहद ही सुनियोजित साजिश के तहत अंजाम दिया जा रहा है।मुम्बई तपास ने अपनी खोज में यह पाया है कि महाराष्ट्र में आप वास्तव में जितनी बिजली खपत कर रहे हैं,उसके बीज आकार के अलावा, आपसे स्थिर आकार,वहन आकार,इंधन समायोजन आकार और बीज शुल्क के रूप में करीब 30 से 35% तक की अतिरिक्त राशि वसूली जा रही है। इसके अलावा आधुनिकता के नाम पर जितने बार भी आपका मीटर बदला जाता है,उसकी वसूली अलग से की जाती है। लोगों को बिजली बील की लूट से बचाने के लिए बिजली नियामक आयोग की स्थापना की गई थी,जिसमें लोगों के सामने पारदर्शक रूप से बिजली उत्पादन से लेकर उसके डिस्ट्रीब्यूशन तक का खर्च साझा करना था,मगर यह नियामक आयोग भी लगता है लूटेरों के साथ हो गया है। जब एक सरकारी कंपनी लोगों से इतनी बड़ी आर्थिक लूट कर रही है और लोग फिर भी खामोश हैं तो इसका मतलब है कि हम मानसिक गुलामी की ओर आगे बढ़ रहे हैं।



