उच्च न्यायालय ने नवी मुम्बई महानगरपालिका का कान अमेठा

नवी मुम्बई के पूरी तरीके से अवैध ईमारतों के जड़ पर, इस बार मुम्बई उच्च न्यायालय ने जबरदस्त प्रहार किया है। मुम्बई तपास के संपादक और जनहित याचिका 80/2013 के याचिकाकर्ता, राजीव मोहन मिश्रा की तरफ से पिछले 11 सालों से पालिका,सिडको,एमआईडीसी और स्थानीय पुलिस के भू माफियाओं के साथ संबंध को लेकर, सभी संबंधित विभाग प्रमुख और मंत्रालयों को पत्र लिखकर यह मांग की जाती रही है कि ऐसे अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाये। मगर सभी ने अपनी आंख और कान पर पट्टी बांध रखा था। लेकिन इस बार मुम्बई उच्च न्यायालय में उनकी चोरी पकड़ ली गई है।16 जून 2026 को एडवोकेट किशोर शेट्टी की एक न्यायालय अवमान याचिका की सुनवाई के बाद ,आज उसका एक छोटा ऑर्डर मुम्बई उच्च न्यायालय की वेबसाइट पर अपलोड हुआ है। भले ही यह ऑर्डर पन्नों के हिसाब से छोटा हो,मगर इस ऑर्डर में लिखी बातें बहुत बड़ी हैं। उच्च न्यायालय ने अपने पहले ही पारा में यह स्पष्ट किया है कि नवी मुम्बई महानगरपालिका ने अपने प्रतिज्ञापत्र में,बड़ी चालाकी से इस बात को छुपाने का प्रयास किया है कि नवी मुम्बई की पूरी तरीके से अवैध ईमारतों का निर्माण किस किस नोड में किन किन अधिकारियों के कार्यकाल में पूरा हुआ है। इसके बाद के पारा में माननीय न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि किसी भी हाल में पालिका आयुक्त को उन अधिकारियों की सूची न्यायालय को सौंपनी पड़ेगी,जिनके कार्यकाल में सबसे ज्यादा अवैध ईमारतों का निर्माण हुआ है। साथ ही पालिका आयुक्त को यह भी बताना पड़ेगा कि लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई क्यों नही की गई। मुम्बई उच्च न्यायालय के इस आदेश के सामने आने के बाद कई वर्तमान और पूर्व अधिकारियों पर गाज गिरनी लगभग तय मानी जा रही है।



