माननीय उच्च न्यायालय का स्पष्टीकरण,नही होंगे अवैध इमारत नियमीत

नवी मुम्बई के अवैध निर्माण कार्य से जुड़े एडवोकेट किशोर शेट्टी की एक न्यायालय अवमान याचिका की सुनवाई के दौरान, मुम्बई उच्च न्यायालय ने सर्वोच्च न्यायालय के 2025 के एक आदेश का हवाला देते हुए यह स्पष्ट किया कि अवैध इमारतों को कतई नियमीत नही किया जा सकता। वर्ष 2025 के अपने एक आदेश में सर्वोच्च न्यायालय ने सभी राज्य सरकारों के लिए यह संदेश दिया है कि कानून तोड़नेवालों पर दया नही दिखाया जा सकता,वरना कानून तोड़ना देश में एक प्रचलन बन जायेगा, जिसका बेहद गंभीर परिणाम भविष्य में देश को भुगतना पड़ सकता है।सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में यह स्पष्ट किया है कि जो लोग अपने फायदे के लिए शहर के नियोजन के नियमों को ठेंगा दिखाते हुए दो दो,तीन तीन मंजिलों की अवैध इमारत बनाते हैं,अगर उनके इन अवैध इमारतों को नियमीत करने का प्रयास किया गया तो यह किसी अपराधी को इनाम देने के बराबर होगा। मुम्बई उच्च न्यायालय में जस्टिस गडकरी और जस्टिस कमलखट्टा की बेंच ने सर्वोच्च न्यायालय के इस आदेश को,नवी मुम्बई महानगरपालिका और राज्य सरकार के वकील के सामने रखते हुए,एक तरह से यह हिदायत दी कि इस सुनवाई के दौरान अवैध इमारतों को नियमीत करने का कोई बहाना नही चलेगा। दरअसल नवी मुम्बई के प्रकल्पग्रस्तों और अवैध इमारतों में रहनेवाले लोगों को खुश करने के उद्देश्य से,महाराष्ट्र सरकार अवैध इमारतों के रेग्युलाइजेशन को लेकर तीन तीन बार नये नये जी आर सामने ला चुकी है और यह आश्वासन दे चुकी है कि वह सभी इमारतों को नियमीत करेगी,मगर मुम्बई उच्च न्यायालय के इस रूख के बाद अवैध इमारतों का नियमीत होना,लगभग असंभव दिखाई दे रहा है।



