फर्जी कागजातों पर की गई करोड़ों की खरीद बिक्री के खुलासे के बाद भी एफआईआर नही

माननीय मुम्बई उच्च न्यायालय के अनेकों सख्त आदेशों के बाद भी, नवी मुम्बई के भू माफिया क्यों बेखौफ हैं,इसका एक खुलासा दो दिन पहले ही न्यायालय के एक फर्जी स्थगन आदेश से हुआ था। लेकिन अभी इस प्रकरण के दो दिन भी नही बिते थे कि इस संदर्भ में,एक और बेहद ही गंभीर खुलासा सामने आया है। इस बार भी मामला सरकारी फर्जी दस्तावेजों से ही जुड़ा है। घणसोली,कोपरखैरणे और ऐरोली गांव के कई विकासकों ने जो अवैध बहुमंजिली ईमारतें,सिडको की अधिग्रहित जमीन पर अतिक्रमण करके बनाई हैं, उन ईमारतों को वैध बताकर उसके मकान और दूकान को बेचने के लिए फर्जी सीसी और फर्जी ओसी का इस्तेमाल किया है।इस संदर्भ में मुम्बई तपास को जो दस्तावेजी सबूत हासिल हुए हैं,उससे यह स्पष्ट होता है कि घणसोली नोड के गोठीवली गांव में हाउस नंबर 1067 पर जो 6 मंजिली अवैध ईमारत बनाई गई है,उसके विकासक गुरूकृपा इंटरप्राइजेज द्वारा,जो मकान और दूकान रजिस्टर्ड डीड के द्वारा बेचे गये हैं,उसमें नवी मुम्बई महानगरपालिका के फर्जी सीसी और ओसी का इस्तेमाल किया गया है।इसी तरीके से ऐरोली नोड में भी सिडको की अधिग्रहित भूखंड पर एआईआर-डीएसडब्लू-1630 नामक एक संपति पर जो 6 मंजिली अवैध ईमारत बनाई गई है,उसके विकासक ने भी इस ईमारत के मकानों और दूकानों को बेचने के लिए अपने रजिस्टर्ड सेल डीड में, पालिका के फर्जी सीसी और ओसी का इस्तेमाल किया है। इन सबके पुख्ता सबूत मुम्बई तपास के पास मौजूद हैं और मुम्बई तपास के संपादक राजीव मोहन मिश्रा ने,इन सारे सबूतों के साथ रबाले पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज करने के लिए लिखित शिकायत दी है।मगर पुलिस और भूमाफियाओं के बीच का संबंध कितना गहरा है,इस बात का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि पुलिस को यह लिखित शिकायत 15 दिसंबर 2025 को ही दे दी गई थी,मगर रबाले पुलिस के अधिकारी,प्राथमिक जांच के नाम पर लगातार एफआईआर दर्ज करने को टालते रहे। इसके बाद सीआरपीसी के सेक्शन 154 के कोरम को पूरा करने के लिए राजीव मोहन मिश्रा ने 25 मार्च को डीसीपी जोन 1 को लिखित शिकायत दी। इसके बाद भी जब एफआईआर दर्ज करने की कोई पहल नही की गई तो राजीव मिश्रा ने व्यक्तिगत स्तर पर पुलिस आयुक्त मिलिन्द भारंबे से मुलाकात कर उन्हे सारी सच्चाई से अवगत कराया। मगर पुलिस आयुक्त के आश्वासन के बाद भी एफआईआर दर्ज नही हुआ। इसके बाद राजीव मिश्रा ने जब डीसीपी जोन 1 में दिये गये लिखित शिकायत पर,डीसीपी के प्रतिक्रिया की जानकारी मांगी तब जाकर इस बात का खुलासा हुआ कि डीसीपी ने एफआईआर दर्ज करने की लिखित स्वीकृती रबाले पुलिस स्टेशन को दे दी है,फिर भी रबाले पुलिस स्टेशन ने अभी तक एफआईआर दर्ज नही किया है । हालांकि ऐसे मामलों के सामने आने पर,मुम्बई उच्च न्यायालय ने तुरंत एफआईआर दर्ज करने और इसकी बेहद ही गंभीरता से जांच किये जाने का निर्देश नवी मुम्बई पुलिस प्रशासन को पहले से ही दे रखा है,मगर भू माफियाओं के प्रेम में जकड़ी नवी मुम्बई पुलिस उनपर कार्रवाई करने की बजाए उन्हे संरक्षण देने में जुटी है। भारत सरकार द्वारा पुराने सीआरपीसी को जो बीएनएसएस में बदला गया है, उसके सेक्शन 199 में इसका स्पष्ट उल्लेख है कि अगर कोई पुलिस अधिकारी किसी दखलपात्र अपराध के खिलाफ, एफआईआर नही लेता है तो उसे एक साल की सजा तक हो सकती है और उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई किया जाना जरूरी होता है,मगर नवी मुम्बई पुलिस आयुक्त मिलिन्द भारंबे के नेतृत्व में,नवी मुम्बई पुलिस के अधिकारियों को न तो न्यायालय के किसी आदेश की चिन्ता है और न ही बीएनएसएस के किसी कानून की। राजीव मिश्रा जल्द ही पुलिस के इस निष्क्रियता के खिलाफ सीआरपीसी 156(3) के तहत न्यायालय का दरवाजा खटखटाने वाले हैं,जिसमें वह संबंधित पुलिस अधिकारियों पर भी कार्रवाई की मांग करनेवाले हैं।



