सभागृह नेता सागर नाईक के व्हाट्सएप से हुआ खुलासा

नवी मुम्बई जैसे सुनियोजित शहर में तेजी से बढ़ रहे अवैध निर्माण कार्यों को लेकर,मुम्बई उच्च न्यायालय भले ही बेहद गंभीर दिखाई देता हो,मगर भू माफियाओं का मनोबल कम होने का नाम नही ले रहा। अब तो वह फर्जी कोर्ट ऑर्डर का इस्तेमाल भी धड़ल्ले से करने लगे हैं। ऐसा ही एक मामला जब बेलापूर के कोर्ट में संबंधित मजिस्ट्रेट के सामने आया तो मजिस्ट्रेट ने इसको बेहद गंभीर मानते हुए,इसमें सु मोटो की कार्रवाई शुरू की और कोर्ट अधीक्षक को तुरंत एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया।सबसे बड़ी बात यह कि इस फर्जी कोर्ट ऑर्डर का खुलासा, स्वयं नवी मुम्बई महानगरपालिका के सभागृह नेता सागर नाईक के एक व्हाट्सएप संदेश से हुआ,जिसे उन्होंने नवी मुम्बई महानगरपालिका आयुक्त को भेजा था। इस संदेश में उन्होंने इस कोर्ट ऑर्डर की प्रति भी भेजी थी। दरअसल नवी मुम्बई के नेरूल नोड में स्थित सारसोले गांव में,सिडको की एक अधिग्रहित भूमि पर अवैध रूप से कब्जा करके,एक पांच मंजिली ईमारत का निर्माण कार्य चल रहा था,जिसके खिलाफ पालिका ने एमआरटीपी 54 का नोटिस तथाकथित जमीन मालिक और विकासक को दिया था। इसी नोटिस को जमीन मालिक ने बेलापूर न्यायालय में चुनौती दी थी। मगर बेलापूर न्यायालय की तरफ से इस चुनौती याचिका पर नोटिस के खिलाफ कोई स्थगन आदेश पारित नही किया गया था। मगर नवी मुम्बई महानगरपालिका के सभागृह नेता सागर नाईक ने इस निर्माणाधीन ईमारत से जुड़े न्यायालय के एक स्थगन आदेश की प्रति,पालिका आयुक्त को भेजी । पालिका आयुक्त ने जब इस स्थगन आदेश के विषय में,अपने विधी अधिकारी से जानकारी हासिल की,तो उन्हे इस स्थगन आदेश के फर्जी होने की जानकारी मिली। इसके बाद पालिका के वकील ने संबंधित न्यायालय को इस स्थगन आदेश की जानकारी दी। न्यायालय ने अपने रिकाॅर्ड से जब इसका मिलान किया तो यह स्थगन आदेश फर्जी निकला। इसके बाद न्यायालय ने इस मामले को बेहद गंभीर मानते हुए इसका सु मोटो संज्ञान लिया और न्यायालय अधीक्षक को इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने के लिए निर्देशित किया। न्यायालय के आदेशानुसार सीबीडी पुलिस स्टेशन में,इस मामले को लेकर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दिया गया है और पुलिस ने इसकी गंभीरता से जांच भी शुरू कर दी है।मगर इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि नवी मुम्बई महानगरपालिका के सभागृह नेता ने, इस फर्जी न्यायालय आदेश की प्रति पालिका आयुक्त को क्यों भेजी और जब पालिका आयुक्त को यह पता है कि यह आदेश की प्रति सागर नाईक ने उनको भेजी है,फिर उन्होंने न्यायालय के सामने उनके नाम का खुलासा न करते हुए वहां अज्ञात व्यक्ति का जिक्र क्यों किया ? जबकि जिस फोन नंबर का वर्णन न्यायालय के सामने किया गया है,वह फोन नंबर ट्रू काॅलर में सागर नाईक का दिखाई देता है। खैर इसके पीछे की कहानी कुछ भी हो मगर यह मामला न्यायालय के फर्जी आदेश से जुड़ा है ,जो बेहद ही गंभीर विषय है। ऐसे ही न्यायालय के एक फर्जी आदेश के मामले में पनवेल कोर्ट के कई वकीलों को गिरफ्तार किया गया है और उनमें से कुछ की जमानत अभी भी नही हो पाई है।



