नवी मुम्बई के मोरबे डैम पर भी खतरा मंडराया

मुम्बई और उसके आसपास के लोगों के मुंह से ऐसा कई बार सुना जाता है कि अगर बारिश ने महाराष्ट्र से, सिर्फ एक साल के लिए मुंह फेर लिया तो फिर मुम्बई और उसके आसपास के क्षेत्रों की स्थिती क्या होगी। अभी तो बारिश ने सिर्फ 8 दिनों के लिए मुंह फेरा है तो कई महानगरपालिकाओं के हाथ पांव फूलने लगे हैं और जल संकट की घोषणा सार्वजनिक रूप से की जाने लगी है।मुम्बई महानगरपालिका सहित नवी मुम्बई महानगरपालिका ने भी अपने दैनिक जल आपूर्ती में 10% से ज्यादा की कटौती की है। नवी मुम्बई महानगरपालिका ने किसी भी प्रकार के बांधकाम के लिए पालिका के पानी की आपूर्ती पर पूरी तरीके से रोक लगा दी है। हालांकि नवी मुम्बई महानगरपालिका का तर्क है कि उसके पास 14 अगस्त तक के पानी का स्टाॅक मोरबे डैम में मौजूद है, मगर पालिका का यह तर्क भी संदेह से परे नही है। अगर पालिका के इस तर्क को सही मान भी लिया जाये तो भी अगर एक साल बारिश ने पूरी तरीके से धोखा दे दिया तो समझो मुम्बई और नवी मुम्बई जैसी शहरों की क्या हालत हो जायेगी। हम इन सब चीजों की परवाह किए बिना जिस तरीके से लगातार कांक्रीट के जंगलों का विस्तार,प्राकृतिक संसाधनों को नष्ट कर किये जा रहे हैं,अगर गलती से प्रकृति ने सिर्फ एक साल के लिए धोखा दे दिया,तो देश की आर्थिक नगरी और उसके आसपास के इलाकों को नरक में तब्दील होने से कोई रोक नही पायेगा और अरब देशों की तरह समुद्र के पानी का विकल्प हमें भी ढूंढ़ना पड़ेगा।



