एकनाथ शिन्दे पर अप्रत्यक्ष रूप से भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का लगाया आरोप

कई वर्षों तक नवी मुम्बई कांग्रेस के एक बड़े नेता के रूप में स्थापित, नामदेव भगत को दूसरी पार्टियों में जाना रास नही आ रहा है। नामदेव भगत ने कांग्रेस छोड़ने के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का दामन थामा। मगर वह यहां ज्यादा दिनों तक टिक कर नही रह पाये। नवी मुम्बई महानगरपालिका चुनाव से ठीक पहले उन्होंने शिवसेना शिन्दे गुट का दामन थाम लिया और शिन्दे गुट के टिकट पर नगरसेवक का चुनाव लड़ गये। मगर उन्हे चुनाव में पराजय का सामना करना पड़ा। नामदेव भगत को यह उम्मीद थी कि शिन्दे सेना उन्हे स्वीकृत नगरसेवक के पद से जरूर सम्मानित करेगी,मगर उनकी यह उम्मीद पूरी नही हो पाई।ऐसा लगता है कि नामदेव भगत यह समझ चुके हैं कि कांग्रेस ने जो सम्मान और ताकत उन्हे प्रदान की थी,वह किसी और पार्टी से उन्हे हासिल होनेवाली नही है। शायद यही कारण है कि उन्होंने सिडको के बहाने अप्रत्यक्ष रूप से अपने ही नेता एकनाथ शिन्दे पर एक बड़ा हमला बोला है। पत्रकारों से बात करते हुए नामदेव भगत ने कहा कि शिन्दे साहब की लापरवाही के कारण सिडको में भ्रष्टाचार लगातार बढ़ता जा रहा है और नये एमडी अश्विन मुद्गल तो भ्रष्टाचार के मामले में पहले से ही बेहद बदनाम हैं,फिर ऐसे व्यक्ति को शिन्दे साहब ने सिडको का एमडी क्यों बनाया?नामदेव भगत के इस तल्ख तेवर के बाद,अब यह कयास लगाये जा रहे हैं कि जल्द ही नामदेव भगत या तो कांग्रेस की शरण में या फिर सुनेत्रा पवार की शरण में वापस आ सकते हैं।



